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लकवा से कैसे बचे : लकवा से बचने के सरल उपाय

लकवा का रोग शरीर के स्नायुओं और स्नायु केंद्र मस्तिष्क का ख़ास रोग हैं. इसलिए जिस व्यक्ति के शरीर का स्नायु मंडल और स्नायु केंद्र मस्तिष्क अच्छी और स्वाभाविक दशा में रहते हैं, उसे लकवा कभी नहीं लगता.

पढ़िए लकवा को कैसे ठीक करे, कैसे बचे इसको ठीक करने के लिए क्या क्या करना चाहिए, कैसा जीवन जीना चाहिए. व जिन लोगों को भी लकवा होने की शंका हैं उनके लिए लकवा से बचाव करने के घरेलु उपाय भी बताएंगे.

लकवा स्वयं कोई रोग नहीं होता, यह मस्तिष्क, रोढ़ तथा किसी स्नायुविशेष की रोगग्रस्त स्थिति का एक प्रमुख लक्षण मात्रा हैं. इसलिए जो लोग इस रोग से बचे रहना चाहते हैं, उन्हें अपने शरीर के स्नायु संस्थान, स्नायु केंद्र और मेरुदंड में किसी तरह की विकृति नहीं आने देनी चाहिए.

पर यह तभी संभव हैं, जब मनुष्य आरम्भ से ही प्राकृतिक जीवन अपनाये, संयम-नियम से काम लें, स्वास्थ्यवर्धक एवं उपयुक्त आहार विहार का आश्रय ले तथा हर तरह के मानसिक तनावों और उद्वेगों से बचा रहे. साथ ही जिन कारणों को अपने संपर्क में न आने दें.

कहा जाता हैं की फालिज अचानक गिरता हैं, अथवा लकवा एक दम से होता हैं, पर यह कथन सही नहीं हैं. लकवा लगने या लकवा मारने के बहुत पहले से ही शरीर से असंयमी जीवन के फलस्वरूप लकवा रोग का बीजारोपण हो चूका रहता हैं.

लकवा लगना तो सिर्फ उस बीज का प्रस्फुटन होता हैं. यह अनुभव में आई हुई बात हैं की लकवा लगने से बहुत पहले मस्तिष्क कमजोर पढ़ जाता हैं, शरीर का स्नायु जल जगह-जगह कमजोर और शक्तिहीन हो जाता हैं, जिससे आंख, कान आदि इन्द्रियों का स्वाभाविक कार्य कलाप मंद पढ़ जाता हैं.

लकवा से बचाव के उपाय

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लकवा लगने से पहले के लक्षण

थोड़ा सा भी काम करने या बात-चीत में मस्तिष्क थकान का अनुभव होता हैं. ये सब लक्षण प्रकट होने लगेंगे, यु समझ लेना चाहिए की लकवा अब लगने ही वाला हैं. तभी परिश्रम के सब काम बंद करके पूरी तरह मानसिक और शारीरिक विश्राम की व्यवस्था करनी चाहिए. अच्छा हो, अगर ऐसी स्थिति में रोगी किसी प्राकृतिक स्थान पर चला जाए. वहां जाकर प्राकृतिक भोजन पर रहे, खुली हवा में टहले, कम बोले, कम परिश्रम करे तथा कब्ज आदि हो तो उसे प्राकृतिक उपायों से दूर करके मनोरंजन के कार्य करे व पूरी गहरी नींद लें.

आम सामान्य व्यक्ति को लकवा से बचाव यानी लकवा लगने से बचने के लिए ब्रह्मचर्य का पालन भी करना चाहिए. साथ ही उत्तेजित खाद्य पदार्थ, जैसे -चाय, चीनी, मसाला, खटाई, अचार, नशे की चीजों आदि से परहेज करना चाहिए. अच्छी किताबे पड़ें, भगवान की प्रार्थना में मन लगाए. अपने सिर को हमेशा ठंडा रखने की कोशिश करना चाहिए.

मेरुदंड पर प्रतिदिन साधारण स्नान करने से पहले 5 मिनट तक ठंडा पानी का तरारा दें. रोज 10 मिनट तक घर्षण कटी स्नान और दस मिनट मेहर स्नान अवश्य करे. इसके साथ ही रोजाना सुबह के समय उषा पान भी करे. रात को हलके वस्त्र पहने या नंगे सोये. सर पर कद्दू, नारियल या शुद्ध तिल्ली के तेल की मालिश भी करे.

 

लकवा से बचाव के लिए चूर्ण – कैसे ठीक करे लकवा को 

स्नायु केंद्र मस्तिष्क को शुद्ध करने और उसे शक्तिशाली बनाने के लिए ब्राह्मी, कागजी बादाम और देशी शक्कर पांव पांव भर लेकर सबका बारीक चूर्ण बना लें और चूर्ण को 3-6 माशा की मात्रा में सुबह और शाम दोनों समय धारोष्ण गाय के दूध से सेवन करना चाहिए.

इतना करने से लकवा होने की शंका दूर होती हैं और मनुष्य लकवा से बच जायेगा. यह लकवा दूर करने के उपाय में सबसे बेहतरीन हैं.

लकवा ठीक करने के उपाय

शरीर की एक और स्थिति होती हैं, जिस स्थिति में लकवा लगने की प्रबल आशंका होती हैं. अगर किसी को कब्ज रहता हैं, खाना ठीक से नहीं पचता है, खट्टी डकारें आया करती हैं, भोजन से अरुचि हो जाती हैं, थकावट अधिक महसूस होती हैं, सिर दर्द बराबर बना रहता हैं, सिर खाली प्रतीत होता हैं, मामूली सी कड़ी बात सहन नहीं होती हैं, दूषित विचार तंग करते रहते हैं, वहां का बहुत सताता रहता हैं.

तथा बेचैनी घबराहट, उदासी, भय, चिढ-चिढ़ापन, क्रोध, द्वेष, ईर्ष्या, लोभ और घृणा आदि मानसिक विकार सताते हैं, अगर वह अपने आपमें विश्वाश खो देता हैं, अपने जीवन से निराश हो जाता हैं, उसकी इन्द्रिया उसके वश में नहीं हैं, थोड़ी-सी मेहनत में सांस फूलने लगती हैं, त्वचा ढीली-ढीली और बदरंग हो गई है और वह सदा हलचल और परेशानी का जीवन व्यतीत करता है और आराम कभी नहीं लेता, ब्रह्मचर्या का पालन नहीं करता, उसके रक्तचाप और रक्तसंचार में अस्वाभविकता होती हैं.

किसी काम को करने में उत्साह नहीं होता, आत्मघात, हत्या चोरी आदि दुनियाभर के पाप करने की प्रवत्ति होती हैं तथा असमय में ही बूढ़ा नजर आता हैं तो ऐसा व्यक्ति निश्चय ही देर या सबेर लकवा का शिकार बनता हैं.

इस स्थिति में पहुंचे हुए स्नायु दौर्बल्य के रोगी का केवल ऊपर वर्णित सावधानी बरतने से ही लकवा रोग से बचाव नहीं हो सकता, बल्कि उसके रोग साथ-साथ उसे निम्नलिखित कुछ अन्य प्राकृतिक प्रयोग भी करने पड़ेंगे, जिससे उसके शरीर के स्नायु पुनः सशक्त हो जायेंगे और लकवा का शिकार होने से बच जाएगा.

उपवास 

शरीर को अम्ल विष से शून्य करने के लिए उपवास से बढ़कर और कोई उपाय नहीं होता. तीन दिनों का उपवास तो घर पर ही बड़े मजे से किया जा सकता हैं, मगर तीन दिनों का उपवास करने की आवश्यकता जान पड़े तो किसी अनुभवी प्राकृतिक चिकित्सक की देखरेख में करने ठीक रहता हैं. रोगी अगर अधिक कमजोर हो तो उसे उपवास की जगह फलों के रस या तरकारियों के रस सूप या दोनों पर भी रखा जा सकता हैं. लकवा ठीक करने के उपाय में उपवास का बहुत ही अहम् महत्त्व हैं.

नियमित व्यायाम

लकवा से कैसे बचे – रोज नियमित रूप से कोई हल्का व्यायाम करना शरीर के दुर्बल कमजोर स्नायु मंडल को मजबूत सबल बनाने में बड़ा सहायक होता हैं. इस कार्य को निर्बल रोगी रोज सुबह व शाम शक्तिभर टहलकर पूरा कर सकता हैं. इससे लकवा से बचाव के साथ-साथ रोगी को और भी कई अन्य लाभ होंगे.

गहरी स्वांस लेना

Kapalbhati Pranayama

इसके लिए योगिक प्राणायाम सर्वश्रेष्ठ हैं. प्राणायाम न किया जा सके तो निचे लिखी श्वास की दो क्रियाए लाभ के साथ की जा सकती हैं किसी प्राकृतिक स्थान में चला जाए, वहां जाकर प्राकृतिक भोजन पर रहते हुए अगर यह उपाय किये जाए तो इनके लाभ पांच गुना अधिक हो जाते हैं.

1. खुली और साफ़ जगह पर बैठकर या खड़े होकर धीरे-धीरे गहरी स्वांस लीजिये और कुछ क्षण सांस भीतर रोक रखने के बाद धीरे-धीरे ही उसे बाहर निकाल दीजिये. सांस खींचते समय यह ध्यान रखिये की ज्ञानेन्द्रियों की शक्ति निकलकर मेरुदंड में स्थित सूर्यचक्र में संचित हो रही हैं और बाहर निकालते समय यह ध्यान कीजिये की उपयुक्त संचित शक्ति सूर्यचक्र से निकलकर शरीर के अनु-अनु में व्याप्त होकर उसे सशक्त बना रही हैं. इस क्रिया को कई बार कीजिये.

2. समतल भूमि पर नंगे बदन चित लेट जाइये. शरीर को पूर्ण रूप से शिथिल कर लीजिये. अब नासिकों से धीरे-धीरे स्वांस खींचना आरम्भ कीजिये. आरम्भ में धीरे-धीरे वायु पेट में, फिर ऊपर भाग में भरते हुए फेफड़े को वायु से पूरा भर लीजिये.

बाद में वेग से आयु भरिये और फिर मुंह द्वारा वायु को धीरे-धीरे जिस वेग से भरा था, उसे बाहर निकल दीजिये. उसके बाद शीघ्र ही फिर वायु भरना आरम्भ कीजिये. इस क्रिया में कुम्भक की भीतर सांस रोकने की आवश्यकता नहीं होती. इसे कई बार कीजिये. जब थकान सी महसूस होने लगे तो थोड़ी देर रुक जाइये व फिर थकान कम होने पर वापस यही क्रिया दोहराइये.

इन क्रियाओं को करने के बाद सिर में चक्कर आएगा. इसका कारण शुद्ध वायु और अशुभ रक्त का संयोग हैं. शुद्ध वायु अशुद्ध रक्त के विष को जला डालती हैं, जिससे कार्बन गैस उतपन्न होती हैं. इसी से चक्कर आता हैं. 10 मिनट या इससे अधिक समय तक इन क्रियाओं को करने से शरीर के किसी भाग में एक तरह की सनसनाहट मालुम होगी, तब समझिये की सारे शरीर का रक्त शुद्ध हो गया हैं.

इसके बाद भी 5-7 मिनट तक अभ्यास जारी रखना चाहिए. तत्पश्यात थोड़ी देर शांत पड़े रहना चाहिए. ये क्रियाये स्नायुओं की निर्बलताता और अशुद्ध रक्त से उतपन्न होने वाले सम्पूर्ण रोगों को नष्ट करती हैं. रात को सोते समय और सुबह जागने पर यह क्रिया की जा सकती हैं. सुबह के समय जितने जल्दी हो सके इन क्रियाओं को कर लेना चाहिए. (लकवा को कैसे ठीक करे) इसके लिए सबसे अच्छा समय हैं सुबह 6 बजे का, इससे पैरालिसिस में बचाव पैरालिसिस प्रिवेंशन ज्यादा होता हैं.

नींद विश्राम और शिथलीकरण 

लकवा एक कठिन नाड़ीविकार हैं. इस विकार को न होने देने के लिए यह जरुरी है की व्यक्ति को रोज गाढ़ी और मीठी नींद आये और वह ऐसी नींद कम से कम ७ घंटे तो अवश्य ही ले. इसी तरह काम करने के बाद भी विश्राम की उसे आवश्यकता होती हैं और शिथिलीकरण की भी. शिथिलीकरण के लिए शवासन एक उपयोगी आसान हैं.

नींद, विश्राम, शिथलीकरण से अनु इन्द्रियों के तत्व का निर्माण होता हैं तथा थकान पैदा करने वाले दूषित स्राव शरीर में एकत्र नहीं हो पाते. इसलिए जो लोग यह चाहते हैं की वे लकवा के शिकार कभी न हों, उन्हें इन चीजों का प्रयोग लगातार करते रहना चाहिए. यह प्रयोग मानसिक तनाव, शारीरिक तनाव व मन में शान्ति लाने वाले हैं, आप इन्हें एक बार जरूर कर के देखिये, इन्हें आम स्वस्थ व्यक्ति भी कर सकता हैं जरुरी नहीं की जिनको लकवा से बचाव करना हो वही इन्हें करे.

त्वचा को शुद्ध और साफ रखना

हमारे शरीर की त्वचा का वही काम हैं जो हमारे फेफड़ों का हैं. इसलिए इन्हें स्वस्थ और सक्रीय बनाये रखने के लिए हमे खुली वायु में निवास करना चाहिए. ढीले-वाले और साफ़ कपडे पहनने चाहिए. त्वचा को रोज नियमित रूप से शुष्क घर्षण व्यायाम देना चाहिए. ऐसा व्यायाम साधारण स्नान के पहले और बाद दो बार करना चाहिए.

High blood pressure से बचाव करे

हाई ब्लड प्रेशर भी लकवा को जन्म देता हैं. हमने बहुत से रोगियों को देखा हैं जिन्हें सिर्फ हाई ब्लड प्रेशर की वजह से ही लकवा लगा था. इसलिए लकवा को ठीक कैसे करे इस के लिए आप सबसे पहले अपने हाई ब्लड प्रेशर को ख़त्म करे. अगर आपको लकवा रोग होगा हैं तो इसको ख़त्म करने से आपको बहुत सहायता मिलेगी और अगर आपको लकवा नहीं हैं और हाई ब्लड प्रेशर हैं तो भी इसे ख़त्म करे ताकि भविष्य में आपको कभी लकवा लगने की कोई सम्भावना ही न रहे.

तनाव से दूर रहे

किसी रोग के होने के पहले मन खराब या अस्वस्थ हो जाता हैं. इसलिए स्वास्थ्य सुधार के क्रम को चलाते समय चिंता, निराशा और निरानंद को प्रक्षय देना आवश्यक और निर्थक हैं. जीवन में सदैव आनंद और प्रसन्नता का अनुभव करना चाहिए और सरल शांत रहकर परमात्मा और उसकी प्राकृति में पूर्ण विश्वाश और आस्था रखनी चाहिए.

उम्मीद करते हैं मित्रों DR सुदीप मेहता द्वारा बाये गए लकवा से बचाव व बचने के घरेलु उपाय, lakwa se bachne ka upay को पढ़कर आपको बहुत मदद मिली हो. आप इन बताई गई टिप्स को ध्यान में रखे व रोजाना नियम से इनका पालन भी करते रहिये. अब आप इस विषय में जरा भी न सोचे लकवा से कैसे बचे इसको ठीक कैसे करे क्योंकि यह जो आसान उपाय बताये हैं यह सभी तरह से लकवा के मरीज के लिए फायदेमंद हैं. आप कुछ दिन कर के देख सकते हैं, लकवे से हमेशा बचे रहने के लिए इन सभी का नियमित पालन जरूर करे – धन्यवाद.

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2 Comments

  1. Ho skta hai aapko koi aur problem ho, aap iske liye apne najdiki doctor se miliye aur checkups karwaye.

  2. Hello sir ,
    Sir aaj kal mere hath or Pao me sone ke Baad sunn ho rha hai aaj apka article. Padh ke muje ye bhî ehesas hua ki mere hath Pao pure din bejan se lagte hai pr Chiti (ant) chle toh mhesus hota hai sir mere ankh or sir me drd bhî hota hai sir plz muje btaiye ki muje lakes lag skta hai plz sir iska Pura niwarn dijie
    Mera email niche hai , plz sir jaldi se reply kriye

    [email protected]

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